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वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी ने NARL के सहयोग से GNSS रिसीवर स्थापित कर अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान को दी नई दिशा
सीहोर, 10 जुलाई 2026: भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्यरत “राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला (National Atmospheric Research Laboratory – NARL)” ने एक सहयोगात्मक पहल के तहत वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में आयनोस्फीयर और अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) के अवलोकन के लिए अपनी ‘नॉर्थ–साउथ चेन फॉर आयनोस्फीयर एंड स्पेस वेदर ऑब्जर्वेशन’ के अंतर्गत GNSS रिसीवर प्रणाली स्थापित की है।
यह अत्याधुनिक सुविधा विश्वविद्यालय की अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके साथ ही यह वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में अंतरिक्ष मौसम, स्वदेशी नेविगेशन प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह उन्नत GNSS रिसीवर आयनोस्फीयर से जुड़े महत्वपूर्ण मानकों की निरंतर निगरानी को सक्षम बनाएगा। इनमें टोटल इलेक्ट्रॉन कंटेंट (Total Electron Content – TEC), आयनोस्फेरिक सिंटिलेशन, सिग्नल क्षरण (Signal Degradation), लॉस ऑफ लॉक (Loss of Lock) और भूमध्यरेखीय प्रक्रियाओं के साथ-साथ सौर एवं भू-चुंबकीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले गतिशील आयनोस्फेरिक विक्षोभ (Travelling ionospheric Disturbances) शामिल हैं।
इस सुविधा से प्राप्त डेटा आयनोस्फेरिक विज्ञान, अंतरिक्ष मौसम, भूगणित (Geodesy) तथा पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (Positioning, Navigation and Timing – PNT) अनुप्रयोगों से जुड़े अनुसंधान को समर्थन प्रदान करेगा। साथ ही, यह उपग्रह नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत करने में योगदान देगा।
इस सहयोगात्मक परियोजना का विश्वविद्यालय स्तर पर समन्वय कर रहे डॉ. शरद चन्द्र त्रिपाठी, वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने कहा, “VIT भोपाल यूनिवर्सिटी इस सहयोग को संभव बनाने के लिए NARL के निदेशक का आभार व्यक्त करती है। GNSS रिसीवर सुविधा की स्थापना हमारे अनुसंधान बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण विस्तार है और यह उच्च प्रभाव वाले वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह सुविधा आयनोस्फीयर के निरंतर अवलोकन को संभव बनाएगी तथा GNSS, NavIC और अंतरिक्ष मौसम के क्षेत्र में बहुविषयक अनुसंधान के नए अवसर प्रदान करेगी। इसके साथ ही, यह छात्रों को वास्तविक समय के वैज्ञानिक डेटा से जुड़ने का अवसर देगी और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान को और अधिक मजबूत बनाएगी।”
यह सहयोग अब विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए GNSS, NavIC, अंतरिक्ष मौसम तथा भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों (Geospatial Technologies) के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करेगा। इससे विश्वविद्यालय का अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र (Research Ecosystem) और अधिक मजबूत होगा तथा राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों के साथ भविष्य के सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।


